दिवाली के इस मुक़द्दस दिन, ख़ुदा करे,
दुनिया जहाँ की खुशियाँ तुम्हे नसीब हो |
किसी भी गम का साया न पड़े तुम पर,
तेरे सभी चाहने वाले, तुम्हारे करीब हो ||
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एक ये चाँद है, और एक " वो " चाँद है |
ये हमसे दूर है, वो भी मगर पास नहीं ||
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खुशियाँ कितनी खुशियाँ देती है,
कभी-कभी तो आँसू निकल आते है |
आँसू मेरे गिरकर, दामन में तेरे,
सच्चे मोती बन जाते है ||
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अतीत के काले बादलों पर,
आपकी कुछ यादें रख छोड़ी थी |
तेरे ख़यालों का सावन आया,
और ये जी भर के बरसी ||
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तेरे बाद भी तेरी गली में जाना न भूले |
तू भूले तो भूले, लेकिन तेरी गली न भूले ||
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आपसे ज्यादा, हमारा आपके गम से नाता है,
ज़िन्दगी के हर मोड़ पर ये मुझे बुलाता है |
मेरी तन्हाईयों का बड़ा दुश्मन है ये,
जब ज़रा से तन्हा हुए, चला आता है ||
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अपने प्यार की मजबूरियों का,
हम भला किसको दोष दें |
हमारे दरम्यान फ़ासले इतने थे,
कि मजबूरियां भी बहुत मजबूर थी ||
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आपकी जुदाई का गम मुझसे,
इक पल की भी जुदाई सहन नहीं करता ||
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सोचा है कुछ ऐसा, हम कर जायेंगे,
शोहरत पाकर सारी, आपके नाम कर जायेंगे |
आप इस तरह मुझसे जुड़ जायेंगे,
दुनिया वाले मुझे तेरे नाम से बुलाएंगे ||
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आप न थे तो समझते थे, की बहुत तन्हा हो गए |
आपसे मिले तो देखा,अपनी तन्हाईयों से भी जुदा हो गए ||
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कुछ पलों, का, साथ, उम्र भर की सौगात,
इतने सारे गम, बाँटें किसके साथ |
अजनबियों की भीड़ में अपना दिखता नहीं,
पराए चेहरों से कैसे मिला लें हाथ ||
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मन के उड़ते परिंदों को,
कहाँ तक काबू में रखें |
आपकी याद आयी नहीं की,
सातवें आसमां पर पहुचे नहीं ||
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आप तो आप है, मुझे याद करके भूल गए |
और एक हम है, आपको भुला के भी भुला न सके ||
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कहाँ भूल पाता है वो आवारा ज़माना,
जवानी में ज़ी को, जी भर के सताना |
दर्द ज़िन्दगी के क़रीब है जितना
उतना क़रीब, तेरे चाहता था, मैं आना ||
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लोग नाहक ही दर-बदर ढूंढते फिरते है,
तेरा घर ज़न्नत, तेरे माँ-बाप फ़रि श्ते है |
क्या करोगे जाकर मन्दिर में, मस्जिद में,
सच्चे दिल से निभाओ जो घर के रिश्ते है ||
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जो कुछ नहीं लगते, वही अपने है,
नींद में आये हुए, जैसे सपने है |
डूबने वाले डूब जाते है लेकिन,
साहिल की तमन्ना की सबने है ||
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एक मुद्दत बाद कुछ अच्छा लिखा है,
कागज़ में जब चेहरा आपका दिखा है |
आपकी दिल-अज़ीज़ यादें बन गई कलम,
अश्कों ने बन के स्याही, अफसाना लिखा है ||
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इंसान जिन्हें महसूस करता है ,
उन्हें सबसे मखसूस करता है |
सुख देता है, दुनिया ज़हान के,
ग़मों से उन्हें दूर रखता है ||
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तन्हाईयों में तुम अक्सर याद आते हो,
नींद में आकर मुझको जगा जाते हो ||
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इजहारे-तमन्ना ना करके ये हासिल है |
उनकी मोहब्बत का दिल में भ्रम बाकी है ||
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हवा जब चली सभी बादल उड़ गए,
रोने को थे तैयार, मगर रुक गए |
जाने क्या रिश्ता है दोनों के बीच में,
दोस्त है कभी, कभी दुश्मन बन गए ||
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भगवान कितने ग़म है तेरी दुनिया में,
हर आँख नम है, तेरी दुनिया में |
हर कदम पर कांटे बिछाने वाले लोग,
फ़रिश्ते है मगर कम है तेरी दुनिया में |
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जो भी दिल सोचे वो कर गुजरो,
अच्छा या बुरा है बाद में सोचो |
इंसानियत ढूंढने निकलो जब भी,
सबसे पहले अपने दिल में खोजो ||
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मैं नहीं जानता मैं तेरा रास्ता हूँ या मंजिल,
चाहता हूँ इक बार तू इधर से गुजर जाये |
याद जब मेरी आये पलकों को दबा लेना,
आँखों में कहीं अश्कों के सैलाब न ठहर जाये ||
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जब भी देखता हूँ, तू नई सी लगती है,
दुनिया मौत, तू ज़िन्दगी सी लगती है |
मौत तो चलो मेरी महबूबा है, मगर,
ए ज़िन्दगी तू मेरी क्या लगती है ||
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एक शाम आप बहुत याद आये |
सूखे हुए अश्क आँखों से निकल आये ||
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ख़ामोशी से बैठकर एक-दूजे के रू-ब-रू |
करेंगें हम आँखों से गुफ्तगू ||
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मैं तुमसे मिलूं, तुम मुझसे मिलो,
जब भी मिलो, मिल कर मिलो |
सफ़र पे ही मिलते है हमसफ़र,
गर चलना पड़े, तो अकेले भी चलो ||
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जो ख़वाब, ख़वाब ही में टूट जाते है,
सुबह उठते ही बेइंतहा याद आते है |
सुना है प्यार भरे दिलों में खुदा रहता है,
मगर अक्सर ये मन्दिर टूट जाते है ||
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खुदा की बनाई कायनात में,
क्या - क्या खूब नज़ारे है |
जुदाई में मगर आपकी,
फीके ये सब सारे है ||
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जब कोई पास नहीं होता,
तब तुम पास होते हो |
जब तुम पास होते हो,
कोई दूसरा पास नहीं होता ||
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आबाद करो चाहे बर्बाद करो |
अपनी मोहब्बत से आजाद करो ||
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ज़िन्दगी कुछ खफ़ा - खफ़ा है आजकल,
जो दर्द था, वो दवा है आजकल |
मेरी तो कोई बात नहीं, सह लेता हूँ,
मेरे दर्द को ही दर्द होने लगा है आजकल ||
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आप जो मेहरबां हो जाते,
जमीं पर आसमां हो जाते |
राह में न होते गर आप,
गुम ये नामोनिशां हो जाते ||
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जब कभी दिल उदास होता है |
तू कहीं आसपास होता है ||
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जाने क्यूँ ऐसा होता है,
ख़ुशी में गम छिपा होता है |
मुस्कराहट के कटोरे में,
आंसू का सैलाब भरा होता है ||
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फ़ैसला तुम को भूल जाने का,
एक नया ख़वाब है दीवाने का |
फिर रहे है अब मारे- मारे,
बड़ा शौक था दिल लगाने का ||
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मिलकर बिछुड़ गए प्यार भरे दिल,
है कितना आसान,सब कहते है मुश्किल |
अब ढूंढने पर भी नहीं मिलते,
आँखें बंद करके जो जाते थे मिल ||
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तुम्हारे पहलु में बैठकर रो लिए,
थकी थी आँखें, कुछ देर सो लिए |
गर्द थी जमी बीते दिनों की,
चुनाचें अश्कों से नैन धो लिए ||
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जो जाकर मिले तुमसे,
रोज़ नई कड़ी जोड़ता हूँ |
हर रात शब्दों के महल,
बनाता और तोड़ता हूँ ||
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प्यार का इक मुजस्सम गुलदस्ता हो,
मंजिल हो मेरी तुम या रस्ता हो |
अब तो हो चुका सौदा दिल का,
महंगा हो चाहे सस्ता हो ||
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राज -ए- इफ्शां आँखों से बोलना चाहिए,
दरवाजा पलकों का चुपके से खोलना चाहिए |
शायद दिल के किसी कोनेमें मिल जाये ख़ुशी,
गाहे - बगाहे दिल को टटोलना चाहिए ||
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तेरे मेरे प्यार के दायरे हाथ से निकल गए है,
या तो तुम बदल गए हो या हम बदल गए है |
लोग खफ़ा, दोस्त परेशां, चाँद-सूरज बुझे-बुझे,
एक तुम क्या बदल गए सब बदल गए है ||
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किसी को मोहब्बत में इनकार मिलता है,
किसी को ख़ुद का साया बेकरार मिलता है |
कितने खुशनसीब होतें होगें वो लोग,
जिन्हें प्यार के बदले प्यार मिलता है ||
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आइना - ए - दिल टूटा सही,
इसमें कोई सूरत तो है।
ख़वाहिश उनकी ख़वाब सही,
ख़वाब मगर खूबसूरत तो है ।।
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कुछ पाने की अभिलाषा,
कुछ खोने का डर |
इन्हीं बातों में कट जायेगा,
जीवन का सफ़र ||
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लफ़्ज़ों पर किसका जोर चला है ज़ज्बातों के सिवा,
लाईलाज़ मर्ज़ ठीक नहीं होते मुनाज़ातों के सिवा ।
एक अर्सा हुआ है उन्हें देखे उन्हें सुने हुए,
सब कुछ भूल चूका हु कुछ एक बातों के सिवा।।
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सब है मेरे अपने खैरख्वाह |
मगर अपनापन है जाने कहाँ ||
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एक तेरी याद, याद रही |
बाकी सब भूल गया ||
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रहूँगा मैं तुम्हारे साथ हमेशा परछाई बन कर |
तनहा जब होगीं, आ जाऊँगा तन्हाई बन कर ||
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कहीं कोई चुभ न जाये कांटा तुम्हारे पैर में,
आसमां जैसे तेरे क़दमों में बिछना चाहता हूँ |
शिद्दत से रुका है आँसुओं का सैलाब आँखों में,
कोई कंधा मिले, सर रख के रोना चाहता हूँ ||
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